सीबीआई पर मचे घमासान पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जांच एजेंसी के दोनों टॉप बॉस बिल्लियों की तरह लड़ रहे थे.
केंद्र ने कहा कि सीबीआई के दो टॉप अफसरों आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी जंग में दखल देना ज़रूरी था.
चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के एम जोसफ़ की पीठ के सामने इस मामले में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल केंद्र की ओर से पैरवी कर रहे थे.
उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों के झगड़े से जांच एजेंसी की छवि और प्रतिष्ठा पर असर पड़ रहा था और इस वजह से देश की प्रतिष्ठित जांच एजेंसी की स्थिति बेहद हास्यास्पद हो गई थी.
अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढांचा ढहाए जाने की तारीख 6 दिसंबर को कई हिंदू संगठनों ने आयोजनों का ऐलान किया है. बाबरी एक्शन कमेटी के यौम-ए-ग़म और विश्व हिंदू परिषद के विजय दिवस सहित अन्य संगठनों द्वारा कार्यक्रम करने के ऐलान को लेकर प्रशासन ने समूचे ज़िले में अलर्ट घोषित कर दिया है.
6 दिसंबर को विभिन्न संगठन विजय दिवस, शौर्य दिवस, यौमे ग़म दिवस और अन्य कार्यक्रमों के मद्देनज़र प्रशासन ने पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के इंतज़ाम किए हैं.
राम जन्मभूमि की ओर जाने वाले मार्गों पर बैरियर कर पहरेदारी सख्त कर दी गई है और गहन जांच और तलाशी अभियान चल रहा है.
दोनों सदनों के अध्यक्षों ने बुलाई सर्वदलीय बैठक
11 दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में कामकाज सुचारू रूप से चलने को लेकर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और राज्यसभा अध्यक्ष एम. वेंकैया नायडू ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है.
इसके अलावा सरकार ने भी 10 दिसंबर को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है.
इन बैठकों का उद्देश्य ऐसे मुद्दों पर सर्वसम्मति बनाना है जिनके शीतकालीन सत्र में उठाए जाने की संभावना है.
गौरतलब है कि विपक्ष के पास लोकसभा चुनाव से पहले सरकार को सदन में घेरने का यह आखिरी मौक़ा होगा और उसके पास सरकार से जवाब मांगने के लिए रफ़ाएल डील, किसानों के संकट का मसला और सीबीआई जैसे कई अहम मुद्दे हैं.
रथ यात्रा की अनुमति के लिए कोर्ट पहुंची भाजपा
भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में रथ यात्रा निकालने के इजाज़त देने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट की शरण ली है.
भाजपा ने यह दावा किया है कि पश्चिम बंगाल प्रशासन ने राज्य में 7 दिसंबर से तीन रैलियां निकालने की इजाजत मांगनेवाले उसके आवेदनों पर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है.
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इसी दिन राज्य में तीन 'रथ यात्राओं' पर आधारित पार्टी की 'लोकतंत्र बचाओ रैली' की शुरुआत करने वाले हैं.
इलाहाबाद अब प्रयागराज
Wednesday, December 5, 2018
Monday, November 26, 2018
शेयर बाजारः सेंसेक्स 219 और निफ्टी 73 अंक टूटा
इस कारोबारी हफ्ते के चौथे दिन शेयर बाजार ने तेज शुरुआत की थी लेकिन बाद में इसकी रफ्तार धीमी हो गई. गुरुवार को सेंसेक्स 219 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ. निफ्टी ने भी गिरावट के साथ कारोबार समेटा है.
गुरुवार को सेंसेक्स 218.78 अंकों की गिरावट के साथ 34,981.02 के स्तर पर बंद हुआ. निफ्टी की बात करें तो यह 73.30 अंक टूटा है. इस गिरावट के साथ यह 10,526.75 के स्तर पर बंद हुआ है.
कारोबार खत्म होने के दौरान अडानी पोर्ट्स, एलटी, एचडीएफसी और इंफोसिस के शेयर टॉप गेनर में शामिल हुए.
वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा, ग्रासिम, हिंडाल्को, बजाज फाइनेंस और इंडियन ऑयल कंपनी के शेयर लाल निशान के नीचे बंद हुए.
इससे पहले सुबह शेयर बाजार ने तेज शुरुआत की. सेंसेक्स ने 85 अंकों की बढ़त के साथ रफ्तार भरी तो निफ्टी 19 अंकों की मजबूती के साथ खुला.
इससे सेंसेक्स 35284.36 के स्तर पर खुला. निफ्टी ने भी 10618.80 के स्तर पर कारोबार शुरू किया.
भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बन रहे करतारपुर साहिब कॉरिडोर की नींव आज रखी जानी है. ये कॉरिडोर ऐलान के साथ ही राजनीतिक जंग का हिस्सा बन गया है. ऐलान के बाद श्रेय लेने की होड़ मची और अब नींव रखी जाने के दौरान भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो रही है.
पंजाब सरकार में मंत्री एसएस रंधावा ने नींव रखने से पहले शिलापट पर अपने, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पंजाब के अन्य मंत्रियों के नाम के आगे काली टेप लगाई. उन्होंने कहा कि इस पर अकाली-बीजेपी वाले नेताओं का नाम क्यों हैं. वह इसका विरोध कर रहे हैं.
पंजाब सरकार के मंत्रियों का कहना है कि कॉरिडोर बनाने का फैसला आनन-फानन में लिया गया है, केंद्र सरकार को अभी ये भी नहीं पता है कि कॉरिडोर कहां बनाना है. पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और सुखजिंदर रंधावा ने कहा कि पाकिस्तान ने 28 नवंबर को आधारशिला रखने का कार्यक्रम तय कर दिया है.
उन्होंने कहा कि इसी वजह से आनन-फानन में केंद्र सरकार ने 26 नवंबर को ही पंजाब सरकार को आधारशिला का कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दे दिया. जबकि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया जिसे इस कॉरिडोर को बनाना है, उसे अब तक ये ही नहीं पता कि ये कॉरिडोर कहां से निकाला जाएगा और इस कॉरिडोर की आधारशिला कहां रखी जाएगी.
राज्य सरकार में मंत्री सुखविंदर सिंह रंधावा ने कहा कि हरसिमरत कौर बादल ने नवजोत सिद्धू को कौम का गद्दार बताया था, अब वो खुद पाकिस्तान जा रही हैं. वह क्या मुंह लेकर वहां जाएंगी. अकाली दल ने आजतक इस मुद्दे को नहीं उठाया था.
कांग्रेस नेताओं की हो रही अनदेखी
इसके अलावा उन्होंने आधारशिला के कार्यक्रम के दौरान हो रही अनदेखी पर भी सवाल उठाया. ग्रामीण और शहरी विकास मंत्री बाजवा ने केंद्र द्वारा समारोह के लिए व्यवस्था का विरोध करते हुए कहा कि "पंजाब के नेताओं और मंत्रियों को वक्ताओं और मंच साझा करने वालों की सूची में कोई स्थान नहीं दिया गया है."
गुरुवार को सेंसेक्स 218.78 अंकों की गिरावट के साथ 34,981.02 के स्तर पर बंद हुआ. निफ्टी की बात करें तो यह 73.30 अंक टूटा है. इस गिरावट के साथ यह 10,526.75 के स्तर पर बंद हुआ है.
कारोबार खत्म होने के दौरान अडानी पोर्ट्स, एलटी, एचडीएफसी और इंफोसिस के शेयर टॉप गेनर में शामिल हुए.
वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा, ग्रासिम, हिंडाल्को, बजाज फाइनेंस और इंडियन ऑयल कंपनी के शेयर लाल निशान के नीचे बंद हुए.
इससे पहले सुबह शेयर बाजार ने तेज शुरुआत की. सेंसेक्स ने 85 अंकों की बढ़त के साथ रफ्तार भरी तो निफ्टी 19 अंकों की मजबूती के साथ खुला.
इससे सेंसेक्स 35284.36 के स्तर पर खुला. निफ्टी ने भी 10618.80 के स्तर पर कारोबार शुरू किया.
भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बन रहे करतारपुर साहिब कॉरिडोर की नींव आज रखी जानी है. ये कॉरिडोर ऐलान के साथ ही राजनीतिक जंग का हिस्सा बन गया है. ऐलान के बाद श्रेय लेने की होड़ मची और अब नींव रखी जाने के दौरान भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो रही है.
पंजाब सरकार में मंत्री एसएस रंधावा ने नींव रखने से पहले शिलापट पर अपने, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पंजाब के अन्य मंत्रियों के नाम के आगे काली टेप लगाई. उन्होंने कहा कि इस पर अकाली-बीजेपी वाले नेताओं का नाम क्यों हैं. वह इसका विरोध कर रहे हैं.
पंजाब सरकार के मंत्रियों का कहना है कि कॉरिडोर बनाने का फैसला आनन-फानन में लिया गया है, केंद्र सरकार को अभी ये भी नहीं पता है कि कॉरिडोर कहां बनाना है. पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और सुखजिंदर रंधावा ने कहा कि पाकिस्तान ने 28 नवंबर को आधारशिला रखने का कार्यक्रम तय कर दिया है.
उन्होंने कहा कि इसी वजह से आनन-फानन में केंद्र सरकार ने 26 नवंबर को ही पंजाब सरकार को आधारशिला का कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दे दिया. जबकि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया जिसे इस कॉरिडोर को बनाना है, उसे अब तक ये ही नहीं पता कि ये कॉरिडोर कहां से निकाला जाएगा और इस कॉरिडोर की आधारशिला कहां रखी जाएगी.
राज्य सरकार में मंत्री सुखविंदर सिंह रंधावा ने कहा कि हरसिमरत कौर बादल ने नवजोत सिद्धू को कौम का गद्दार बताया था, अब वो खुद पाकिस्तान जा रही हैं. वह क्या मुंह लेकर वहां जाएंगी. अकाली दल ने आजतक इस मुद्दे को नहीं उठाया था.
कांग्रेस नेताओं की हो रही अनदेखी
इसके अलावा उन्होंने आधारशिला के कार्यक्रम के दौरान हो रही अनदेखी पर भी सवाल उठाया. ग्रामीण और शहरी विकास मंत्री बाजवा ने केंद्र द्वारा समारोह के लिए व्यवस्था का विरोध करते हुए कहा कि "पंजाब के नेताओं और मंत्रियों को वक्ताओं और मंच साझा करने वालों की सूची में कोई स्थान नहीं दिया गया है."
Tuesday, November 13, 2018
इलाहाबाद अब प्रयागराज, शहर का नाम बदलने को योगी कैबिनेट की मंजूरी
यूपी कैबिनेट ने मंगलवार को कुंभनगरी इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने के फैसले को हरी झंडी दे दी. इलाहाबाद अब अाधिकारिक रूप से प्रयागराज कहलाएगा. इससे पहले फैजाबाद जिले का नाम अयोध्या करने का निर्णय लिया गया था जिसे मंगलवार की बैठक में पारित कर दिया गया.
कुछ दिन पहले ही संतों ने इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रस्ताव दिया था. जिसके बाद यूपी सीएम ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका ऐलान किया था.
शहर का नाम बदलने के साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का नाम भी बदल जाएगा. गौरतलब है कि अगले साल होने वाले कुंभ से पहले इलाहाबाद चर्चा का केंद्र बना हुआ है. योगी सरकार कुंभ को लेकर बड़े पैमाने पर तैयारी कर रही है, शहर में जीर्णोद्धार का काम युद्ध स्तर पर जारी है. अभी कुछ समय पहले ही योगी सरकार ने ऐतिहासिक मुगलसराय स्टेशन का नाम बदल कर दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रख दिया था. इसके अलावा कई योजनाओं और स्थानों का नाम बदला जा चुका है.
पेंडिंग में कई नाम
केंद्र सरकार ने पिछले एक साल में कम से कम 25 शहरों और गांवों के नाम बदलने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी है, जबकि नाम बदलने के कई प्रस्ताव उसके पास लंबित हैं. इनमें पश्चिम बंगाल का नाम बदला जाना भी शामिल है. जिन इलाकों के नाम बदले गए हैं उस लिस्ट में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद और फैजाबाद ताजातरीन इजाफा है.
कई प्रस्तावों को केंद्र सरकार की इजाजत का इंतजार है. इनमें पश्चिम बंगाल का नाम ‘बांग्ला’ करने का भी प्रस्ताव भी शामिल है. यह प्रक्रिया काफी लंबी है और इसमें कई केंद्रीय मंत्रालय और विभाग भी शामिल होते हैं. गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एजेंसी भाषा को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले एक साल में देश के कई हिस्सों में 25 शहरों और गांवों के नाम बदलने के प्रस्तावों को सहमति दी है.
पर बैन को लेकर उपजी सियासी सरगर्मी के बीच कांग्रेस ने सफाई दी है. मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रमुख कमलनाथ ने कहा कि ‘वचन पत्र’ में पार्टी ने या उन्होंने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की बात नहीं कही. कमलनाथ ने कहा कि पार्टी की ऐसी कोई मंशा भी नहीं है.
कमलनाथ ने कहा कि भाजपा जानबूझकर इस तरह के मुद्दों को हवा देकर जनता को भ्रमित करना चाहती है, ताकि हमारे ‘वचन पत्र’ के जनहितैषी मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके. उन्होंने भोपाल में पत्रकारों से कहा कि हमने कभी नहीं कहा कि हम आरएसएस पर प्रतिबंध लगाएंगे. न हमारी ऐसी मंशा है. मैंने या कांग्रेस पार्टी ने कभी नहीं कहा कि हम आरएसएस पर प्रतिबंध लगाएंगे.
कमलनाथ ने कहा कि सरकारी स्थानों को छोड़कर आरएसएस को शाखाएं लगाने की पूरी छूट है. यह जनता तय करेगी कि आरएसएस सामाजिक संगठन है या राजनीतिक. हम इसमें नहीं पड़ना चाहते हैं.
उन्होंने कहा कि इस बारे में सुझाव आये थे कि आदिवासी छात्रावासों एवं अन्य सरकारी स्कूलों में, जहां आरएसएस की शाखाएं लग रही हैं, वहां बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है. इसके बाद हमने अपने ‘वचन पत्र’ में इस बिंदु को शामिल किया.
गौरतलब है कि शनिवार को जारी अपने ‘वचन पत्र’ में कांग्रेस ने कहा था कि यदि प्रदेश में उसकी सरकार आती है तो वह शासकीय परिसरों में आरएसएस की शाखायें लगाने पर प्रतिबंध लगायेंगे तथा शासकीय अधिकारी एवं कर्मचारियों को शाखाओं में छूट संबंधी आदेश निरस्त करेंगे.
कुछ दिन पहले ही संतों ने इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रस्ताव दिया था. जिसके बाद यूपी सीएम ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका ऐलान किया था.
शहर का नाम बदलने के साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का नाम भी बदल जाएगा. गौरतलब है कि अगले साल होने वाले कुंभ से पहले इलाहाबाद चर्चा का केंद्र बना हुआ है. योगी सरकार कुंभ को लेकर बड़े पैमाने पर तैयारी कर रही है, शहर में जीर्णोद्धार का काम युद्ध स्तर पर जारी है. अभी कुछ समय पहले ही योगी सरकार ने ऐतिहासिक मुगलसराय स्टेशन का नाम बदल कर दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रख दिया था. इसके अलावा कई योजनाओं और स्थानों का नाम बदला जा चुका है.
पेंडिंग में कई नाम
केंद्र सरकार ने पिछले एक साल में कम से कम 25 शहरों और गांवों के नाम बदलने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी है, जबकि नाम बदलने के कई प्रस्ताव उसके पास लंबित हैं. इनमें पश्चिम बंगाल का नाम बदला जाना भी शामिल है. जिन इलाकों के नाम बदले गए हैं उस लिस्ट में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद और फैजाबाद ताजातरीन इजाफा है.
कई प्रस्तावों को केंद्र सरकार की इजाजत का इंतजार है. इनमें पश्चिम बंगाल का नाम ‘बांग्ला’ करने का भी प्रस्ताव भी शामिल है. यह प्रक्रिया काफी लंबी है और इसमें कई केंद्रीय मंत्रालय और विभाग भी शामिल होते हैं. गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एजेंसी भाषा को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले एक साल में देश के कई हिस्सों में 25 शहरों और गांवों के नाम बदलने के प्रस्तावों को सहमति दी है.
पर बैन को लेकर उपजी सियासी सरगर्मी के बीच कांग्रेस ने सफाई दी है. मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रमुख कमलनाथ ने कहा कि ‘वचन पत्र’ में पार्टी ने या उन्होंने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की बात नहीं कही. कमलनाथ ने कहा कि पार्टी की ऐसी कोई मंशा भी नहीं है.
कमलनाथ ने कहा कि भाजपा जानबूझकर इस तरह के मुद्दों को हवा देकर जनता को भ्रमित करना चाहती है, ताकि हमारे ‘वचन पत्र’ के जनहितैषी मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके. उन्होंने भोपाल में पत्रकारों से कहा कि हमने कभी नहीं कहा कि हम आरएसएस पर प्रतिबंध लगाएंगे. न हमारी ऐसी मंशा है. मैंने या कांग्रेस पार्टी ने कभी नहीं कहा कि हम आरएसएस पर प्रतिबंध लगाएंगे.
कमलनाथ ने कहा कि सरकारी स्थानों को छोड़कर आरएसएस को शाखाएं लगाने की पूरी छूट है. यह जनता तय करेगी कि आरएसएस सामाजिक संगठन है या राजनीतिक. हम इसमें नहीं पड़ना चाहते हैं.
उन्होंने कहा कि इस बारे में सुझाव आये थे कि आदिवासी छात्रावासों एवं अन्य सरकारी स्कूलों में, जहां आरएसएस की शाखाएं लग रही हैं, वहां बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है. इसके बाद हमने अपने ‘वचन पत्र’ में इस बिंदु को शामिल किया.
गौरतलब है कि शनिवार को जारी अपने ‘वचन पत्र’ में कांग्रेस ने कहा था कि यदि प्रदेश में उसकी सरकार आती है तो वह शासकीय परिसरों में आरएसएस की शाखायें लगाने पर प्रतिबंध लगायेंगे तथा शासकीय अधिकारी एवं कर्मचारियों को शाखाओं में छूट संबंधी आदेश निरस्त करेंगे.
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